Personal Homepage

Blog

The World as I see it

मैं कौन हूँ?

fire-01  

 

जो कभी न बुझने पाए, उस दावानल की आग हूँ मैं जो गीत त्याग के गाए, संगीत का वो राग हूँ मैं उफनते सागर में उठते, लहरों की हुंकार हूँ मैं जो हर रण में सदा गूंजी है, वीरों की ललकार हूँ मैं

विजय का उद्घोष करता, पाञ्चजन्य का नाद हूँ मैं अग्नि जिसे न जला सकी, वह विष्णु-भक्त प्रह्लाद हूँ मैं क्रोध में नाचते प्रलयंकारी शिव का तांडव नृत्य हूँ मैं जो कभी न विस्मृत हो सके, वैसा ही अस्तित्त्व हूँ मैं

करुण-प्रताड़ित कंठों की, पीड़ित आवाज़ हूँ मैं जो अन्याय का नाश करे, उस युद्ध का आगाज़ हूँ मैं हर वीर के रगों में दौड़ती, ऊष्ण रक्त की धार हूँ मैं शत्रु के प्राणों को हर ले, वह अंतिम प्रहार हूँ मैं

दुस्साशन की जांघें तोड़े, वह भीम की गदा हूँ मैं एक अथक प्रहरी के भांति, सजग खड़ा सदा हूँ मैं जहां वीरों के दल सजते हैं, वह पावन समरक्षेत्र हूँ मैं धर्म-अधर्म का क्रीड़ाक्षेत्र, धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र हूँ मैं